विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस 2026: जटिल रोग-विज्ञान और अत्याधुनिक न्यूरोसर्जरी के बीच की दूरी को कम करता आधुनिक उपचार डॉ. घनश्याम ससापर्धी
विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस 2026: जटिल रोग-विज्ञान और अत्याधुनिक न्यूरोसर्जरी के बीच की दूरी को कम करता आधुनिक उपचार
डॉ. घनश्याम ससापर्धी
एम.सीएच. न्यूरोसर्जरी (पीजीआई चंडीगढ़) वरिष्ठ न्यूरोसर्जन, नारायणा हेल्थ, रायपुर
हर वर्ष 8 जून को विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस के रूप में मनाया जाता है। मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर का निदान किसी भी परिवार के लिए चिंता और भय का कारण बन सकता है। लेकिन आधुनिक न्यूरोसर्जरी ने इतनी प्रगति कर ली है कि जो कभी असंभव माना जाता था, वह आज नियमित और सुरक्षित उपचार का हिस्सा बन चुका है।
पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ जैसे विश्वस्तरीय संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करने और पिछले 11 वर्षों में 1000 से अधिक जटिल मस्तिष्क एवं रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर ऑपरेशन करने के अनुभव के आधार पर मैंने मरीजों के उपचार और परिणामों में एक क्रांतिकारी बदलाव देखा है।
सर्जरी की सुरक्षा में आया बड़ा बदलाव
पहले न्यूरोसर्जरी का मुख्य उद्देश्य केवल ट्यूमर को निकालना होता था। आज हमारा लक्ष्य ग्रॉस टोटल रिसेक्शन (GTR) प्राप्त करना है, साथ ही मरीज की जीवन गुणवत्ता को पूरी तरह सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
नारायणा हेल्थ, रायपुर में हम केवल एक अंग का उपचार नहीं करते, बल्कि मरीज की बोलने, चलने-फिरने, सोचने और याद रखने की क्षमता को भी संरक्षित रखने का प्रयास करते हैं।
हमारी मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर में तकनीक की सुरक्षा कवच
न्यूरोसर्जरी को अधिक सुरक्षित और सटीक बनाने के लिए हम विश्वस्तरीय तकनीकों का उपयोग करते हैं:
डीटीआई (डिफ्यूजन टेन्सर इमेजिंग) एमआरआई
यह तकनीक मस्तिष्क की महत्वपूर्ण "व्हाइट मैटर ट्रैक्ट्स" यानी नसों के नेटवर्क का विस्तृत नक्शा तैयार करती है। इससे हमें यह पता चलता है कि बोलने, समझने और शरीर को नियंत्रित करने वाले तंत्रिका मार्ग कहाँ स्थित हैं, जिससे सर्जरी के दौरान उन्हें सुरक्षित रखा जा सके।
इंट्रा-ऑपरेटिव न्यूरोमॉनिटरिंग (IONM)
इसे नसों के लिए "GPS" कहा जा सकता है। यह ऑपरेशन के दौरान वास्तविक समय में तंत्रिका तंत्र की कार्यक्षमता की निगरानी करता है और सर्जरी को अधिक सुरक्षित बनाता है।
सीयूएसए (कैविट्रॉन अल्ट्रासोनिक सर्जिकल एस्पिरेटर)
यह अत्याधुनिक तकनीक ट्यूमर को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर सुरक्षित रूप से निकालने में मदद करती है, जबकि आसपास की रक्त वाहिकाओं और महत्वपूर्ण नसों को नुकसान से बचाती है।
हाई-प्रिसीजन माइक्रोस्कोप और हाई-स्पीड ड्रिल्स
इन उपकरणों की सहायता से "कीहोल सर्जरी" की जा सकती है, जिससे छोटे चीरे लगते हैं, रक्तस्राव कम होता है और मरीज जल्दी स्वस्थ होकर घर लौट सकता है।
आम जनता के लिए संदेश
ब्रेन या स्पाइन ट्यूमर कोई "मृत्युदंड" नहीं है। सही समय पर निदान, अनुभवी न्यूरोसर्जन, अत्याधुनिक आईसीयू सुविधाएं और समर्पित न्यूरो-रिहैबिलिटेशन टीम की मदद से मरीज पहले से कहीं अधिक तेजी से सामान्य जीवन मैं लौट रहे हैं।
इस विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस पर आइए हम सभी समय पर जांच और शीघ्र निदान के महत्व को समझें। याद रखें, परिवार सबसे पहले आता है और उनका स्वास्थ्य ही हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है।
ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती संकेत क्या हो सकते हैं?
मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर अक्सर ऐसे लक्षणों से शुरू होते हैं जिन्हें लोग सामान्य स्वास्थ्य समस्याएं समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
ब्रेन ट्यूमर के लक्षणः
लगातार सुबह होने वाला सिरदर्द जो समय के साथ बढ़ता जाए।
बिना किसी स्पष्ट कारण के मतली या उल्टी होना।
धुंधला दिखाई देना या दोहरी दृष्टि (डबल विजन) होना।
पहली बार दौरे (सीज़र/फिट्स) पड़ना।
शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना।
चलने में कठिनाई, संतुलन बिगड़ना या लड़खड़ाहट।
व्यवहार, स्मरण शक्ति या बोलने की क्षमता में बदलाव महसूस होना।
यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य इनमें से किसी भी लक्षण का अनुभव कर रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर एमआरआई जांच और विशेषज्ञ परामर्श उपचार की सफलता को काफी बढ़ा सकते हैं।
समय पर पहचान क्यों है जरुरी?
नारायणा हेल्थ, रायपुर में हम DTI MRI, इंट्रा-ऑपरेटिव न्यूरोमॉनिटरिंग और अन्य अत्याधुनिक सर्जिकल तकनीकों का उपयोग कर सुरक्षित और सटीक उपचार प्रदान करते हैं।
हमारा उद्देश्य केवल ट्यूमर का इलाज करना नहीं है, बल्कि मरीज को उसकी सामान्य जीवनशैली, परिवार, कार्यक्षेत्र और पसंदीदा गतिविधियों तक जल्द से जल्द वापस पहुंचाना है।
याद रखें: ब्रेन या स्पाइन ट्यूमर जीवन का अंत नहीं है। सही समय पर उचित उपचार मिलने पर अधिकांश मरीज पूरी तरह सक्रिय और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
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