200 करोड़ से बने सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पर कांग्रेस के सवाल, PPP मॉडल पर सरकार से मांगा जवाब
मन्नू मानिकपुरी संवाददाता बिलासपुर
बिलासपुर। बिलासपुर के कोनी स्थित लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 240 बेड सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और 100 बेड कैंसर केयर अस्पताल के संचालन को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार से कई सवाल पूछे हैं। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं बेलतरा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी विजय केशरवानी ने प्रेस वार्ता में कहा कि जब अस्पताल सरकारी जमीन, सरकारी संसाधनों और जनता के टैक्स के पैसे से बनाया गया है, तो इसके संचालन के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल की आवश्यकता क्यों पड़ी।
उन्होंने कहा कि अस्पताल का उद्घाटन 29 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री द्वारा किया गया था और मुख्यमंत्री भी अस्पताल का निरीक्षण कर चुके हैं। इसके बावजूद अस्पताल अभी तक पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, नर्सिंग स्टाफ और अन्य आवश्यक कर्मचारियों की व्यवस्था अब तक पूरी क्यों नहीं हो सकी और गंभीर मरीजों को आज भी अन्य अस्पतालों में रेफर क्यों किया जा रहा है।
विजय केशरवानी ने दावा किया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के 10 जून 2026 और 26 जून 2026 के शासकीय पत्रों में अस्पताल के संचालन के लिए PPP मॉडल, और कंसल्टेंट के रूप में KPMG का उल्लेख किया गया है। उन्होंने सरकार से पूछा कि अधीक्षक के लिए PPP मॉडल अपनाने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई और इससे आम मरीजों को क्या अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
कांग्रेस ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि PPP मॉडल लागू होने के बाद अस्पताल का नियंत्रण किसके पास रहेगा, इलाज की दरें कौन तय करेगा, गरीब मरीजों के मुफ्त या रियायती इलाज की क्या व्यवस्था होगी और यदि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी होती है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी। साथ ही PPP समझौते की सभी महत्वपूर्ण शर्तों को सार्वजनिक करने की मांग भी की गई।
प्रेस वार्ता में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए विजय केशरवानी ने कहा कि जनता पुराने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि वर्तमान सरकार से वर्तमान व्यवस्था पर जवाब चाहती है। उनका कहना था कि यदि अस्पताल पूरी तरह सुचारु रूप से संचालित हो रहा है तो PPP मॉडल की आवश्यकता क्यों पड़ी।
कांग्रेस ने मांग की कि अस्पताल को तत्काल पूरी क्षमता से शुरू किया जाए, सभी स्वीकृत पदों पर डॉक्टरों एवं कर्मचारियों की भर्ती की जाए, ICU, कैथलैब, ऑक्सीजन प्लांट, इमरजेंसी सेवाएं और एंबुलेंस व्यवस्था पूरी तरह शुरू की जाए। साथ ही PPP मॉडल लागू करने से पहले गरीब एवं आम मरीजों के इलाज के अधिकारों की लिखित गारंटी और उससे जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।






