नैनो उर्वरकों से खेती बन रही अधिक लाभकारी, मिट्टी संरक्षण को भी मिल रही मजबूती
रायपुर।कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और नवाचार आधारित उर्वरकों के उपयोग से किसानों को उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने और मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने में महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है। नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरक प्रदेश के किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इनके उपयोग से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त हो रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ खेती की स्थिरता को भी बल मिल रहा है।
सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम सरई टिकरा निवासी प्रगतिशील किसान श्री महेंद्र प्रसाद राजवाड़े ने नैनो उर्वरकों के उपयोग से प्राप्त अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले कुछ वर्षों से वे धान, गेहूं तथा विभिन्न सब्जी फसलों में नैनो यूरिया का उपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार इस तकनीक से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई है तथा खेती की लागत में भी कमी आई है।
श्री राजवाड़े ने बताया कि नैनो उर्वरकों का उपयोग सरल और सुविधाजनक है। कम मात्रा में उपयोग होने के कारण इसके परिवहन और भंडारण में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होती। छिड़काव के माध्यम से पोषक तत्व सीधे पौधों तक पहुंचते हैं, जिससे फसलों को आवश्यक पोषण समय पर प्राप्त होता है और उनकी वृद्धि अधिक प्रभावी होती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो उर्वरकों की उपयोग दक्षता पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में अधिक होती है। पर्णीय छिड़काव के माध्यम से पौधे पोषक तत्वों को सीधे ग्रहण कर लेते हैं, जिससे उर्वरकों की बर्बादी कम होती है और उत्पादन में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। इसके साथ ही उर्वरकों के संतुलित उपयोग से मिट्टी की उर्वरता और उत्पादक क्षमता को बनाए रखने में भी सहायता मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ नैनो उर्वरकों का उपयोग किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो रहा है। कम परिवहन लागत, आसान उपयोग और बेहतर पोषण प्रबंधन के कारण किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर पा रहे हैं।
राज्य सरकार एवं कृषि विभाग द्वारा किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, नैनो उर्वरकों और आधुनिक खेती की तकनीकों के प्रति जागरूक करने के लिए निरंतर प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। इससे प्रदेश में टिकाऊ एवं उन्नत कृषि को बढ़ावा मिल रहा है।
महेंद्र प्रसाद राजवाड़े ने अन्य किसानों से भी आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने और नैनो उर्वरकों का उपयोग करने की अपील की है। उनका मानना है कि इससे न केवल फसल उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता और कृषि भूमि की दीर्घकालीन उत्पादकता भी सुरक्षित बनी रहेगी। आधुनिक कृषि के इस मॉडल से किसान अधिक आय अर्जित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

