Breaking पुरी रथ यात्रा में भारी भीड़ से भगदड़ जैसी स्थिति, एक की मौत, कई श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती
पूरी। ओडिशा के पुरी में गुरुवार को विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस घटना में कई श्रद्धालु घायल हो गए। एक श्रद्धालु की मौत की भी खबर है।
जमा हुए हैं लाखों श्रद्धालु
यह घटना बड़ा डांडा (ग्रैंड रोड) पर हुई, जहां भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ खींचने के कार्यक्रम को देखने के लिए लाखों श्रद्धालु जमा हुए थे।
बचाव अभियान शुरू किया गया
आपातकालीन बचाव दलों ने घायलों को तुरंत बाहर निकाला और पास के अस्पतालों में पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। जिला प्रशासन, पुलिस, दमकल विभाग और स्वास्थ्य कर्मियों ने तुरंत बचाव और भीड़ को नियंत्रित करने का अभियान शुरू किया, ताकि स्थिति सामान्य की जा सके।
चश्मदीद ने क्या बताया?
- पुरी में घटनास्थल पर मौजूद एक श्रद्धालु ने बताया कि मरीचि कुंड चौक के पास या तो बाहरी घेरे की रस्सी की बैरिकेड गिर गई या कुछ लोग अपना संतुलन खो बैठे और सड़क पर गिर गए।
- उन्होंने बताया कि उन्होंने लगभग 40 से 50 लोगों को एक-दूसरे के ऊपर गिरते देखा, जिससे कई श्रद्धालु घायल हो गए और चार से पांच को गंभीर चोटें आई हैं।
- उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने लगभग 20 लोगों को बचाया और उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया, और अब उन्हें पता चला है कि एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई है।
इसके अलावा, सूत्रों ने यह भी दावा किया कि गुरुवार को श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ और लगातार बारिश के बीच घुटन और विभिन्न चोटों की शिकायत करने वाले लगभग 200 मरीजों को अब तक पुरी के अस्पतालों और अस्थायी स्वास्थ्य सुविधाओं में भर्ती कराया गया है।
मुख्यमंत्री माझी ने क्या कहा?
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस घटना में हुई मौत पर गहरा दुख जताया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि घायलों को बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए।
देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में एक है पुरी रथ यात्रा
जगन्नाथ रथ यात्रा भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। इसमें हर साल देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। भगदड़ के सही कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारी स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
गुरुवार को पवित्र तटीय शहर पुरी में भव्य वार्षिक रथ यात्रा देखने के लिए लाखों लोग एकत्रित हुए। विश्व प्रसिद्ध वार्षिक रथ यात्रा उत्सव की शुरुआत निर्धारित समय से पहले ही दिन में दिव्य भाई-बहनों और अन्य देवी-देवताओं के लिए ‘पहंडी बीजे’ अनुष्ठान के साथ हुई।
‘पहंडी बीजे’ अनुष्ठान के दौरान पवित्र भाई-बहनों और अन्य देवी-देवताओं को 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर से उनके सजाए गए रथों तक भव्य शोभायात्रा के साथ ले जाया गया। इस दौरान घंटा, कहली और तेलिंगी बाजा जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर और दिव्य ध्वनि पूरे वातावरण में गूंजती रही।
पुजारियों ने पवित्र वैदिक मंत्रों का जाप किया और पारंपरिक ओडिसी कलाकारों ने अपने मनमोहक नृत्य प्रदर्शनों से देवताओं का उनके जन्मस्थान माने जाने वाले गुंडिचा मंदिर में नौ दिवसीय प्रवास के लिए स्वागत किया। हालांकि, ‘पहंडी बीजे’ की रस्में निर्धारित समय से पहले शुरू हो गईं। लेकिन गुरुवार को उनके समापन में दो घंटे से अधिक की देरी हुई।

