भीषण गर्मी हाहाकार मचा रही है. क्या आपको अंदाज है कि अगर तापमान 49-50 डिग्री सेल्सियस तापमान को छू ले तो हमारा आपका क्या होगा.
– निष्कर्षों से पता चलता है कि शरीर 40℃ (104F) पर गर्मी का सामना करने में समर्थ है लेकिन 50℃ (122F) पर बिल्कुल नहीं.
– क्लिनिकल शोधों के मुताबिक तापमान बढ़ने पर शरीर एक खास पैटर्न में रिएक्ट करता है. शरीर का 70 फीसदी से ज़्यादा अंश पानी निर्मित है. यानी हमारे शरीर का पानी बढ़ते तापमान में शरीर का तापमान स्थिर बनाए रखने के लिए गर्मी के साथ जूझता है. पसीना आना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है. लेकिन ज़्यादा देर अगर शरीर इस प्रक्रिया में रहता है तो शरीर में पानी की कमी हो जाती है.
– पानी की कमी होते ही हर शरीर अपनी तासीर के हिसाब से रिएक्ट करता है. किसी को चक्कर आ सकते हैं, तो किसी को सिरदर्द हो सकता है और किसी को बेहोशी भी. असल में, पानी की कमी से सांस की पूरी प्रक्रिया प्रभावित होती है. इस वजह से खून का फ्लो बनाए रखने के लिए दिल और फेफड़ों पर ज़्यादा दबाव पड़ता है. इससे रक्तचाप पर भी असर पड़ना स्वाभाविक है.
– पानी हमारे शरीर का जीवन स्रोत है इसलिए हमारे शरीर में सबसे ज़्यादा पानी ही है. गर्मी में पसीना बहने से न केवल पानी बल्कि सॉल्ट यानी नमक की भी कमी होती है. पानी हर अंग के लिए ज़रूरी है. 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के चलते अगर शरीर में पानी की कमी होती है और देर तक बनी रहती है तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं जैसे हीट स्ट्रोक, हार्ट स्ट्रोक या ब्रेन हैमरेज तक.
– इंसानी शरीर पर बढ़ते तापमान के असर के बारे में बात करते हुए डॉक्टर और शोधकर्ता अक्सर ‘हीट स्ट्रेस’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं. जब हमारा शरीर बेहद गर्मी में होता है, तो वो अपने कोर तापमान को बनाए रखने की कोशिश करता है. वातावरण और शारीरिक स्थितियों पर निर्भर करता है कि शरीर अपने कोर तापमान को बनाए रखने की कोशिश किस कदर कर पाता है, ऐसे में हमें थकान भी महसूस करने लगते हैं.
– पारा अगर 40 डिग्री के पार हो जाए, तो शरीर के लिए मुश्किल पैदा हो ही जाती है. हालांकि अलग स्थितियों में असर अलग होता है, लेकिन सामान्य रूप से दिखने वाले लक्षण बताते हुए डॉ. बागई कहते हैं, ‘पारा 40 से 42 डिग्री तक हो तो सिरदर्द, उल्टी और शरीर में पानी की कमी जैसी शिकायतें होती हैं. अगर पारा 45 डिग्री हो तो बेहोशी, चक्कर या घबराहट जैसी शिकायतों के चलते ब्लड प्रेशर का कम होना आम शिकायतें हैं’.
– मानव शरीर का सामान्य तापमान 98.4 डिग्री फारेनहाइट या 37.5 से 38.3 डिग्री सेल्सियस होता है. इसका मतलब ये नहीं है कि 38 या 40 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर आपको गर्मी नहीं लगनी चाहिए. वास्तव में ये शरीर का कोर तापमान होता है. यानी त्वचा के स्तर पर इससे कम तापमान भी महसूस हो सकता है.
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