नगर निगम भिलाई में भ्रष्टाचार चरम पर, राज्य सरकार करे उच्च स्तरीय जांच
आचार्य नरेंद्र देव स्मृति जन अधिकार अभियान समिति ने मुख्यमंत्री साय को भेजा पत्र
भिलाई। आचार्य नरेंद्र देव स्मृति जन अधिकार अभियान समिति ने भिलाई नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। समिति के संयोजक आर पी शर्मा ने इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को विस्तृत पत्र लिखा है।
अपने पत्र में श्री शर्मा ने कहा कि 27 मार्च 2026 को नगर निगम भिलाई में जो बजट पारित हुआ और उस समय निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर जो माहौल बना, ऐसा लगा कि नगर निगम भिलाई का पिछला 4 साल का कार्यकाल भ्रष्टाचार का ही कार्यकाल रहा।
उन्होंने कहा कि पार्षदों और मीडिया के माध्यम से जो तथ्य सामने आए हैं उसके आधार पर कहा जा सकता है कि नगर निगम भिलाई में भ्रष्टाचार की कोई कमी नहीं रही। श्री शर्मा ने बताया कि उन्होंने इस बाबत पूर्व में भी जांच एजेंसियों को पत्र लिखा है। लेकिन राज्य सरकार की जांच एजेंसियां शिथिलता बरत रही है। समाचार पत्रों में और सोशल मीडिया में आने के माध्यम से आए तथ्य करोड़ों के घोटाले की तरफ इशारा करते हैं।
श्री शर्मा ने कहा कि इन सारे मामलों को ज्यादा तूल न दिया जाए इसलिए शायद तत्कालीन आयुक्त को टारगेट किया गया और उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया। इससे जाहिर होता है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने मिलकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है और जांच से बचना भी चाह रहे हैं। इसलिए समिति मांग करती है कि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच किए बिना आयुक्त को न हटाया जाए।
उन्होंने ताजा मामले के तौर पर कैनाल रोड का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लगभग 28 करोड़ रूपए की लागत से 4 साल पहले इस रोड का निर्माण हुआ था। जो अब कई जगह धंसने लगी है। और इस खबर को समाचार पत्रों ने भी प्रमुखता से छापा है। इसकी भी जांच होनी चाहिए।
श्री शर्मा ने कहा कि हाल ही में दक्षिण गंगोत्री की 75 दुकानों को निगम द्वारा ऑनलाइन बेचा गया जो 75 लाख से 1 करोड रुपए तक की कीमत में बिकी और लगभग उतना ही प्लॉट अभी बाकी है और यह प्लॉट गुपचुप तरीके से बेचे गए। निगम क्षेत्र में बिछाए गए करोड़ों रुपए के पेवर ब्लॉक में भी भ्रष्टाचार नजर आता है वह भी अब कुछ ही माह में उखड़ने लगे हैं। जनता और सरकार से मिली धनराशि को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया है।
उन्होंने कहा कि वहीं दूसरी तरफ महापौर नीरज पाल के नेतृत्व में सारे पार्षद गोवा टूर पर निकले हुए हैं और पूछने पर महापौर ने कहा है कि उन्होंने 25 लाख रुपए लोगों से सहयोग लिया है। अब सवाल यह उठता है कि वह कौन-कौन लोग है जिनसे इतनी बड़ी-बड़ी राशि ली गई और उन्हें निगम से किस तरह का फायदा पहुंचाया गया? यह भी एक जांच का विषय है। उन्होंने कहा कि इन सारे प्रकरणों में वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की भी भूमिका अब संदिग्ध नजर आने लगी है। ऐसे लोग जिनके पास आय से अधिक की संपत्ति है इनके भी जांच की जानी चाहिए।
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