20 लाख मीट्रिक टन धान खुले में पड़ा, सूख रहा, बेमौसम बारिश से भीग रहा - कांग्रेस

20 लाख मीट्रिक टन धान खुले में पड़ा, सूख रहा, बेमौसम बारिश से भीग रहा - कांग्रेस
20 लाख मीट्रिक टन धान खुले में पड़ा, सूख रहा, बेमौसम बारिश से भीग रहा - कांग्रेस


रायपुर/30 अप्रैल 2026।
 सरकार की लापरवाही के कारण 20 लाख मीट्रिक टन धान संग्रहण केन्द्रों में खुले में पड़ा है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि धान भीषण गर्मी में सुख रहा है, बे-मौसम बारिश से भीग रहा है। 3100 रु. प्रति क्विंटल में खरीदे गए धान का सरकार निराकरण नहीं कर पाई है। भाजपा दावा करती है डबल इंजिन की सरकार का तो केंद्र से बोल कर पूरे खरीदे गए धान से बने चावल को सेन्ट्रल पुल में दे दे, इससे राज्य को करोड़ों का नुकसान भी नहीं होगा, धान का निराकरण का समाधान भी हो जायेगा। धान खुले में पड़ा सुख रहा है, सड़ रहा है, बाद में इसी के आधार पर पूरा धान खराब हो गया बता कर भ्रष्टाचार करेंगे। चूहों पर तोहमत लगाएंगे।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने प्रदेश की विष्णुदेव सरकार के द्वारा छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान से बना पूरा चावल नहीं खरीदा, जिसके चलते राज्य सरकार को किसानों से खरीदे गए धान के निस्तारण की समस्या उत्पन्न हो गई है। दलीय चाटुकारिता और मोदी-शाह के अधिनायक वाद के चलते राज्य की सरकार केंद्र पर भी दबाव नहीं बन पा रही है। प्रदेश सरकार ने किसानों से खरीदे अतिरिक्त धान को खुले बाजार में बेचने का प्रयास भी किया। 3100 रू. प्रति क्विंटल की दर से खरीदा गया धान परिवहन और हैंडलिंग मिलाकर 3822 लागत मूल्य है जिसे शायद सरकार ने नीलामी का बेस रेट 1900 प्रति क्विंटल तय करके बेचने का प्रयास किया, उसके बावजूद अब तक पूरा धान नीलाम नहीं हो पाया है, और लाखों टन धान सोसाइटियों में खराब हो रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार को छत्तीसगढ़ से कोयला चाहिए, आयरन चाहिए, टीन चाहिए, बक्साईट चाहिए लेकिन छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं से उपार्जित धान से निर्मित चावल के लिए केंद्रीय पूल में जगह नहीं है? डबल इंजन की सरकार में 20 लाख
 मीट्रिक टन धान खुले बाजार में नीलाम करना पड़ रहा है, क्योंकि केंद्र की मोदी सरकार ने दुर्भावना पूर्वक केंद्रीय पुल में चावल का कोटा नहीं बढ़ाया। सरकार की दुर्भावना के चलते जो संग्रहण केंद्रों में धान सड़ रहे हैं उसका नुकसान सीधे तौर पर सरकारी समिति को उठाना पड़ेगा, जिसके चलते हजारों सहकारी समितियां आर्थिक तौर पर बर्बाद हो रही हैं। छत्तीसगढ़ के किसान भारतीय जनता पार्टी की दुर्भावना और छत्तीसगढ़ की उपेक्षा के लिए भाजपा को कभी माफ नहीं करेंगे।