हैदराबाद गुरुद्वारा की ज़मीन पर तेलंगाना सरकार की जबरदस्ती : छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज का विरोध

हैदराबाद गुरुद्वारा की ज़मीन पर तेलंगाना सरकार की जबरदस्ती : छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज का विरोध

हैदराबाद गुरुद्वारा की ज़मीन पर चल रहे विवाद के समाधान हेतु छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज का विरोध

सिक्ख समुदाय की धार्मिक भावना और संवेदनाओं को बचाने के लिए समाज अपनी एकजुटता से पीछे नहीं हटेगा 

रायपुर (छत्तीसगढ़)

छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज ने आज हैदराबाद गुरुद्वारा साहिब की ज़मीन पर चल रहे विवाद के संदर्भ में एक विज्ञप्ति जारी करते हुए अपनी तीव्र चिंता और विरोध व्यक्त किया। यह विवाद सिक्ख समाज के लिए धार्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक रूप से अत्यंत संवेदनशील मामला है। गुरुद्वारा साहिब की ज़मीन को लेकर हाल ही में तेलंगाना राज्य में पक्षपातपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य गुरुद्वारे के आधिकारिक उपयोग को प्रभावित करना और निजीकरण के प्रयास करना है।

गुरुद्वारा की ज़मीन का इतिहास 1832 से जुड़ा हुआ है, जब यह गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अधीन धार्मिक गतिविधियों के लिए समर्पित की गई थी। यह स्थान सिख धर्म के प्रमुख स्थल और आस्था का केंद्र रहा है, जहाँ पर निरंतर धार्मिक और सामाजिक कार्य होते हैं। इस ज़मीन का महत्व सिक्ख समाज के लिए सिर्फ एक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि यह हमारे महान गुरुओं की शिक्षाओं और बलिदानों का प्रतीक भी है। गुरुद्वारा साहिब पर कब्जा करने की किसी भी कोशिश को सिख समाज ने कभी स्वीकार नहीं किया और यह संघर्ष आज भी जारी है।

छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह सिंघोत्रा ने कहा, “हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह भूमि सिक्ख धर्म के अटल अधिकार का हिस्सा है। यह ज़मीन सिक्ख समुदाय से छीनी नहीं जा सकती, हम इसके खिलाफ किसी भी प्रकार की असंवैधानिक कोशिशों का विरोध करते हैं। यह भूमि हमारे गुरुओं के बलिदान और सिख समाज के अतीत का प्रतीक है।"

उन्होंने यह भी कहा कि सिक्ख धर्म के महान गुरुओं श्री गुरु तेग बहादुर जी - गुरु गोविंद सिंह जी और चार साहिबजादों के बलिदान स्वरूप देश के हिंदुत्व और आजादी का प्रमाण है |

 उनका बलिदान कभी भी भूलाया नहीं जा सकता, और हम उनके योगदान को याद रखते हुए इसे अपने धार्मिक अधिकारों के रूप में मानते हैं।

इस विवाद को लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए फैसलों का सम्मान करते हुए छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज ने तेलंगाना सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया है कि वे इस ज़मीन पर सिक्ख समाज के अधिकार को पूरी तरह से सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन न होने दें।

छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह सिंघोत्रा, हरकिशन सिंह राजपूत, नरेंद्र सिंह हरगोत्रा, स्वर्ण सिंह चावला, कुलवंत सिंह खालसा, मनजीत सिंह भाटिया, स्वर्णपाल सिंह चावला, जागीर सिंह बावा, देवेंद्र सिंह चावला, रणजीत सिंह खनूजा, अमृत सिंह सूर, जसप्रीत सिंह चावला, इंदर पाल सिंह गांधी, गुरमीत सिंह छाबड़ा एवं मानवेंद्र सिंह डडियाला,ने यह भी कहा कि सिक्ख समुदाय की धार्मिक भावना और संवेदनाओं को बचाने के लिए समाज अपनी एकजुटता से पीछे नहीं हटेगा । 

सभी फोटो TDN से साभार 

 गुरुद्वारे की ज़मीन का धार्मिक उपयोग अनवरत बना रहे और इसके साथ किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।