कथित सुशासन की पोल खुल रही तो अधिकारियों को धमकाया जा रहा - दीपक बैज
सुशासन नहीं केवल आवेदन तिहार
तथाकथित सुशासन असली पोल सुशासन त्यौहार में खुल रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मंत्री, विधायक, सांसद अब अधिकारियों को धमकाने, चमकाने पर उतर आये है। ढाई साल के सरकार जनता से दूर हो चुकी है। सुशासन त्यौहार के नाम पर जब जनता के बीच जा रहे तब जनाक्रोश को दबाने अधिकारियों पर दोषारोपण कर रहे है। मंत्री दयालदास बघेल मंच से शराब तस्करी के लिए पुलिस को दोषी ठहरा रहे है, तो विधायक रोहित साहू पटवारी को धमका रहे है, सांसद भोजराज नाग अधिकारी को निपटाने की धमकी दे रहे है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सुशासन का दंभ भरने वाली साय सरकार के राज में आम आदमी छोटे-छोटे काम के लिये सरकारी दफ्तरों का चक्कर काटने को मजबूर है। पटवारी कार्यालय से लेकर तहसील दफ्तरों में लोगों के नामांतरण, फौती, त्रुटि सुधार के लाखों आवेदन लंबित है, लोगों के काम नहीं हो रहे, आम आदमी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर है। बेहद दुर्भाग्यजनक है कि लाखों लोगों को सरकार के पास सड़क, नाली, बिजली, पानी जैसे रोजमर्रा के कामों के लिये आवेदन देने सरकार के सुशासन तिहार का इंतजार करना पड़ता है। साय सरकार लोगों के मूलभूत काम को भी नहीं कर पा रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार किस बात का सुशासन त्यौहार मनाने जा रही? यदि सरकार में सुशासन होता तो लोगों का काम नियमित हो रहा होता तो त्यौहार मनाने की जरूरत क्यों पड़ती? यह सुशासन त्यौहार अपनी विफलता से ध्यान भटकाने का तरीका है। पिछले बार भी सुशासन त्यौहार मनाये थे और जनता से जो लाखों आवेदन प्राप्त हुए उसको कचरे के ढेर में फेंक दिए। इस बार के सुशासन त्यौहार के पहले, पिछले साल के आवेदनों के बारे में जनता को बताये उनका अभी तक निराकरण क्यों नहीं हुआ?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि ढाई साल के भीतर ही शांति का टापू कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ को भाजपा की सरकार ने अपराध गढ़ बना दिया है। हत्या, लूट, डकैती, बलात्कार, चाकूबाजी की घटनाएं बेतहाशा बढ़ गई हैं। अवैध शराब, मिलावटी शराब, नकली होलोग्राम, भू-माफिया और रेत माफियाओं के गुंडागर्दी की शिकायत है रोज उजागर हो रही है। सत्ता के संरक्षण में नशे का कारोबार फल-फूल रहा है। गर्मी के दिनों में जब कृषि मजदूर खाली हो जाते हैं उस दौरान मनरेगा के काम हर ग्राम पंचायत में खोले जाते रहे हैं, लेकिन भाजपा की सरकार बनने के बाद से मनरेगा के मजदूर काम के लिए तरस रहे हैं और यह सरकार आत्ममुग्धता में सुशासन तिहार मनाने का ढोंग कर रही है।
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