शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर में RUSA 2.0 प्रशिक्षण कार्यक्रम का पाँचवाँ दिन सफलतापूर्वक संपन्न

शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर में RUSA 2.0 प्रशिक्षण कार्यक्रम का पाँचवाँ दिन सफलतापूर्वक संपन्न

 शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर में RUSA 2.0 प्रशिक्षण कार्यक्रम का पाँचवाँ दिन सफलतापूर्वक संपन्न

शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर में विज्ञान संकाय (रायपुर संभाग) हेतु आयोजित RUSA 2.0 प्रशिक्षण कार्यक्रम के पाँचवें दिन का सफल आयोजन किया गया। आयोजन समिति के सदस्य डॉ. गोवर्धन व्यास ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के पाँचवें दिन कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनके पश्चात एक गहन प्रायोगिक (हैंड्स-ऑन) प्रशिक्षण सत्र संपन्न हुआ।

प्रथम तकनीकी सत्र डॉ. रविन्द्र पांडे, प्राध्यापक, भौतिकी विभाग, मिशिगन टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने नैनोमैटेरियल्स के विशिष्ट गुणों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि क्वांटम कन्फाइनमेंट प्रभाव तथा उच्च सतह-से-आयतन अनुपात के कारण नैनोमैटेरियल्स में अद्वितीय प्रकाशीय, विद्युत एवं यांत्रिक गुण पाए जाते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डेंसिटी फंक्शनल थ्योरी (DFT) बैंड संरचना के विश्लेषण, बैंडगैप के आकलन, स्थिरता की समझ तथा उन्नत अर्धचालक नैनो-उपकरणों के प्रभावी डिज़ाइन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

द्वितीय सत्र डॉ. नमिता ब्राम्हे, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय द्वारा “ल्यूमिनेसेंस और उसके वैज्ञानिक अनुप्रयोग” विषय पर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि ल्यूमिनेसेंस ऊष्मा के बिना प्रकाश का उत्सर्जन है, जो ऊर्जा स्तरों के मध्य इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण के कारण होता है। उन्होंने इसके अंतर्विषयक अनुप्रयोगों—भौतिकी में प्रकाशीय उपकरण एवं फोटोनिक सामग्री, रसायन विज्ञान में अभिक्रिया तंत्र एवं ऊर्जा अंतरण प्रक्रियाओं का अध्ययन, तथा जीवविज्ञान एवं चिकित्सा विज्ञान में बायोइमेजिंग, सेंसिंग एवं चिकित्सीय निदान—पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण किस प्रकार प्रकाश उत्सर्जन का कारण बनते हैं और आधुनिक वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति में ल्यूमिनेसेंट सामग्रियों का कितना महत्व है।

तृतीय सत्र प्रो. बी. केशव राव द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने द्विआयामी हाइब्रिड पॉलीमर सामग्रियों एवं डेंसिटी फंक्शनल थ्योरी आधारित संरचनात्मक अनुकूलन पर चर्चा की। उन्होंने बैंड संरचना विश्लेषण, डेंसिटी ऑफ स्टेट्स (DOS), संरचनात्मक रिलैक्सेशन तथा विश्वसनीय सिमुलेशन हेतु संगणनात्मक मानकों के चयन पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सैद्धांतिक मॉडलिंग, प्रायोगिक अनुसंधान का पूरक है और उन्नत सामग्रियों में नवाचार को गति प्रदान करती है।

समापन सत्र में प्रो. बी. केशव राव, डॉ. रश्मि प्रिया टोप्पो एवं डॉ. विनय पटेल द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। प्रतिभागियों ने डेंसिटी फंक्शनल थ्योरी गणनाएँ, इलेक्ट्रॉनिक बैंड संरचना विश्लेषण, बैंडगैप का आकलन, k-पॉइंट सैम्पलिंग तथा नैनो-डिवाइस अनुप्रयोगों हेतु अर्धचालक सामग्रियों के सिमुलेशन जैसे प्रायोगिक कार्य संपन्न किए। संकाय सदस्यों ने लिनक्स आधारित संगणनात्मक वातावरण में कार्य करते हुए अपने व्यावहारिक अनुसंधान एवं डेटा विश्लेषण कौशल को सुदृढ़ किया।

अपने उद्बोधन में प्राचार्य एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. तपेश चन्द्र गुप्ता ने कहा कि इस प्रकार के सुव्यवस्थित एवं शोध-उन्मुख प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल ज्ञानवर्धन तक सीमित नहीं होते, बल्कि शिक्षकों की अकादमिक दृष्टि, अनुसंधान क्षमता एवं तकनीकी दक्षता को सशक्त बनाते हैं। उन्होंने बताया कि नवीनतम वैज्ञानिक पद्धतियों, संगणनात्मक तकनीकों एवं अंतर्विषयक शोध दृष्टिकोण से परिचित होकर शिक्षक अपने शिक्षण को अधिक प्रयोगधर्मी, विश्लेषणात्मक एवं शोध-आधारित बना सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों में आत्मविश्वास का संचार करते हैं, जिससे वे स्वयं उच्चस्तरीय अनुसंधान करने के साथ-साथ विद्यार्थियों को उन्नत सामग्री विज्ञान, संगणनात्मक मॉडलिंग, नवाचार-आधारित प्रौद्योगिकी एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान जैसे बहुविषयक क्षेत्रों की ओर प्रेरित कर सकते हैं। इससे विद्यार्थियों में जिज्ञासा, समालोचनात्मक चिंतन, समस्या-समाधान क्षमता एवं नवाचार कौशल का विकास होता है।

डॉ. गुप्ता ने यह भी कहा कि आज शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूर्ण करना नहीं, बल्कि ज्ञान सृजन, शोध प्रवृत्ति एवं समाजोपयोगी नवाचार को बढ़ावा देना है। उन्होंने विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मूल सिद्धांत—बहुविषयक शिक्षा, शोध-आधारित अधिगम, कौशल विकास एवं नवाचार—को रेखांकित करते हुए कहा कि जब शिक्षक उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त कर इन सिद्धांतों को व्यवहार में उतारते हैं, तब उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता एवं अकादमिक उत्कृष्टता का स्तर निरंतर उन्नत होता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

कार्यक्रम के सह-समन्वयक डॉ. अखिलेश जाधव ने बताया कि पाँचवें दिन सैद्धांतिक ज्ञान एवं संगणनात्मक अभ्यास का प्रभावी समन्वय देखने को मिला। नैनोमैटेरियल्स, ल्यूमिनेसेंस एवं DFT आधारित अनुकूलन पर क्रमबद्ध सत्रों तथा व्यावहारिक सिमुलेशन प्रशिक्षण से प्रतिभागी संकाय सदस्यों की शोध-उन्मुखता एवं तकनीकी दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

आयोजन समिति सदस्य डॉ. लखपति पटेल ने सभी वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम को सफल एवं ज्ञानवर्धक बनाने हेतु धन्यवाद दिया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बहुविषयक अनुसंधान, संगणनात्मक विशेषज्ञता एवं नवाचार-आधारित उच्च शिक्षा को निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है।

**प्राचार्य**